لا تدخلي الحبَّ من دهاليز التعاطف

هبة شريقي
هبة شريقي
2021/09/08 الساعة 02:40 صباحاً

 

 

احذري دخولَ الحبّ من دهاليز التعاطف.. 
إنّه فخّ.. 
اهربي.. 

(مقدّمة) 

ستجدينه في بدايةِ القصّةِ عجوزاً عاش عمرَه خلف القضبان ظلماً.. 
ستتحوّلينَ إلى محامي دفاع عنه.. 
لن يخرجَ من سجنِه.. 
إنّه فخّ.. 
اهربي.. 

أو ربّما تجدينه طفلاً كبيراً تائهاً.. 
سيحكي لكِ عن ظلم أبويه، عن طفولته المحطّمة، وكيف كان محطَّ تنمّر زملائِه في المدرسة.. 
ستصبحينَ طبيبتَه النّفسيّة.. 
لن يشفى.. 
إنّه فخّ.. 
اهربي.. 

أو ربّما يصوّر نفسَه البطلَ الذي سينقذُ الكوكب، لكنّ الجميعَ يهزؤونَ منه، هو ليس في حاجةٍ إلى شيء سوى أن يصدّقَه أحد.. 
ستصبحينَ مستشارَه الأوّل، وساعدَه الأيمن.. 
لن ينجزَ شيئاً.. 
إنّه فخّ.. 
اهربي.. 

سيحكي لكِ عن علاقاتِه السّابقة، عن خياناتِ النّساءِ له، عن عدمِ اهتمامهنّ بلونِ جواربه وقَصّة شعرِه الجديدة.. 
ستتحوّلينَ إلى خادمة.. 
لن يعجبَه شيء.. 
إنّه فخّ.. 
اهربي.. 
.................... 

(عرض) 

حسناً، لم تفكّري في الهرب بعد.. 

أنتِ الآن إذن محاميه الخاصّ، طبيبُه النّفسيّ، مستشارُه وخادمُه.. 

ستتوهّمينَ أنّكِ خلاصُه.. 
سيقول لك ما يشبه ذلك بمنتهى الضّعف، وربّما يقولها صراحةً.. 
ستمسكين يدَه لتنطلقي به إلى حياةٍ جديدة.. 
سيمشي أولى خطواتِه معكِ فرِحاً مهلِّلاً.. 

مشيتُك لا تُعجِبُه! 
سيغضب.. 

تمشينَ أسرعَ منه.. 
سيتعب.. 

لماذا لا تنتقينَ مفرداتِك حينما تحدّثينَه؟ 
سيتذمّر.. 

أصدقاؤك وحوش، وصديقاتُك يُرِدن جذْبَ انتباهِه.. 
ابتعدي عنهم.. 

رئيسُكِ في العملِ تافه.. 
اتركيه.. 

أحلامُكِ غير منطقيّة.. 
توقَّفي عن هذا الهراء.. 

أتغارين؟ 
ما هذا التخلّف؟ 

الزّواج؟ 
مؤسَّسة فاشلة.. 

الأولاد؟ 
لعنة الحياة الدّنيا.. 

الحبّ؟ 
كذب.. 

الرّجال الأوفياء؟ 
لا يوجد.. 

سيخونك.. 
ستفكّرينَ في الهرب.. 

أين أصدقاؤك؟ 
هو الآن صديقُك الوحيد.. 

عليكِ أن تتفهّمي الأمر.. 
لقد قال لكِ سابقاً: لا رجالَ أوفياء في هذا العالم.. 
والآنَ يُثبِتُ لكِ ذلك لا أكثر.. 

يوم.. 
أسبوع.. 
شهر.. 

العجوزُ نادم، والعالم دونَك سجن.. عودي.. 
االطّفلُ الكبيرُ نادم، سيتوه مجدّداً إن لم يجدك.. عودي.. 
البطلُ العظيمُ غيرُ قادرٍ على التّفكير في غيابك.. عودي.. 
الرّجلُ المعذَّبُ يحترق، كلّ النّساء متشابهات، اثبتي له عكس ذلك..
عودي يا ابنةَ الكلب، عودي.. 


سيكرِّرُها.. 
لا تعودي.. 
إنّه فخّ.. 
اهربي.. 

قلتُ لكِ سيكرِّرُها.. 
هل صدّقتِني الآن؟ 

سيقول لكِ هذه المرّة أنّك مُحِقّة في تَركِه.. 
لكن أرجوكِ، أنتِ ملاذُه الآمن الوحيد، لا أصدقاءَ له غيرك، ماضيه يطاردُه، لقد خسرَ عملَه وساءت صحّته.. 
سيعترف لكِ أنّه لا يستحقّك، لكنّه محتاجٌ إليك.. 

فهمتِ الآن لماذا حذّرتكِ في البداية أن لا تدخلي الحبَّ من دهاليز التعاطف؟ 

لا أحدَ يستطيعُ انتشالَه.. 
إنّه فخّ أقسم بالله.. 
إنّه فخّ.. 
اهربي.. 


لماذا لم تهربي بعد؟! 
أنتِ أعظمُ امرأةٍ عرفها.. 
شكراً لكِ.. 

سيحافظ على وجودِكِ في حياته، سيبذل في سبيلِ ذلك أقصى جهده، سترينَ كم هو صادقٌ في صداقته، سيكشفُ لكِ معجبيك السّرّيّين! يساعدكِ في إنجاز مهامّك، ويتمنّى لك التّوفيق.. 
لا يريدُ شيئاً منكِ، صدّقيه.. 
فقط لا تتركيه وحيداً، كي لا يعودَ إلى ما كان عليه.. 
قولي له إنّك ما زلتِ محامي الدفاع عنه، فأعداؤه كثُر.. 
قولي إنّك ما زلتِ طبيبتَه النّفسيّة، فلم يتخلّص بعد من أمراضه.. 
قولي له إنّك ما زلتِ مستشاره، لديه مشاريعُ كثيرةٌ ليُنجِزَها.. 
لكن.. 
يا أيّتها الخادمة.. 
قدّمي استقالتك وسيمضي عليها بمنتهى السّرور.. 
فأنتِ الآن حُرّة منه.. 
أرأيتِ كم هو صادقٌ في صداقتِه؟ 

هو صديقُك نعم، لكن هناك مشكلة صغيرة جدّاً، لا تفسد للودّ قضيّة: 
لسوء حظّه فإنّ حظّك سيّئ.. 

ستَلجئين إليه بينما يكون مشغولاً بقصّ أظافره.. 
للأسف.. 
يعلم أنّ ذلك ليس عذراً، لكنّه سيحسّن مزاجه السيّئ، وأنت تعلمين تماماً كم هو في أمسّ الحاجة إلى أيّ تفصيل بسيط يحسّن مزاجه.. 
تَفَهَّمي.. 

هو جاهزٌ للاستماعِ إلى مشكلاتِك، لكنّ التّشويشَ النّاتجَ عن مشكلاتِه الأعظم والأكثر تعقيداً جعله فاقدَ التّركيز.. 
اعذري.. 

ثمّ عن أيِّ مشكلاتٍ تتحدّثين؟ 
لو جرّبتِ الموازنةَ بينها وبين مشكلاتِه لوجدتِ نفسك غارقةً في النّعيم! 
لا تعتبي.. 

أين أصدقاؤك؟ 
ههههههه 
لقد (فقعتِ في الوَخّ).. 
............... 

(خاتمة) 

ستشعرينَ بأنّكِ في حاجةٍ إلى عزلة.. 
إلى أين؟ 
بدأتِ تشعرينَ بأنّك مدفونةٌ في الفخّ.. 
ستحاولينَ الهرب.. 
ستبتعدين.. 
تتذكّرين.. 
تُحلِّلين.. 
تتوجّعين.. 
ستندمينَ
ستندمينَ.. 
ستندمينَ.. 
ستندمين.. 

سيُحِبُّكِ رجلٌ سليم.. 
ستُحِبّينَهُ جدّاً.. 
وتكتشفينَ أنّكِ أصبحتِ مريضة! 

______________________
(مونولوج/فصام) 

-غير قادرة على تصديقه! 
-إنّه يُحبّك.. 
-لا رجالَ أوفياء في هذا العالم.. 
-واللهِ يُحبّك.. 
-سيتخلّى عنّي عندَ أوّل مشكلة.. 
-لن يتخلّى عنك، يُحبّك يا بنت، يُحبّك.. 
-أنا خائفة.. 
-لا تخافي، إنّه يُحبّك. 
-وإن عرفَ أنّني مريضة؟ 
-سيُحبّك أكثر، إنّه يُحبّك. 
-أُحِبّه جدّاً.. 
-وأنا أكثر.. 
_______________________ 

الحمدلله على سلامتك.. 
يقولون إنّ الاعترافَ بالمرضِ أوّلُ العلاج.. 

هنالك رجلٌ سليم يُحبّك.. 
ستشفينَ من أجلِه.. 
لا تتأخّري.. 
إنّه سليمٌ؛ ليس في حاجةٍ إلى أن ينتظرَ طويلاً.. 

قلت: لا تتأخّري.. 

لا تتأخّري.. 


______________
(مونولوج/فصام) 
-حدِّثيهِ عن مرضِك.. 
-خائفة.. 
-حدِّثيه.. 
- لقد تأخّرَ الوقت.. 
-حدّثيه.. 
-إنّهُ سعيدٌ الآن.. 
-حدِّثيه.. لا تتأخّري.. 
______________ 



تأخّرتِ.. 

انتكاسةٌ أخرى.. 

ندمٌ أكبر.. 

مرضٌ أشدُّ خطورةً.. 

قلتُ لكِ إنّه فخّ.. 

وكان عليكِ أن تهربي.. 

اهربي.. 
.
.......... 

ستكتبينَ ربّما نصّاً كهذا
ستصبحينَ عدوَّه.. 
سيُهاجِمُك بشراسة.. 
لم يعد يهمّك شيء.. 

هسسسسسس.. 
اهربي..